मेदांता अस्पताल एवं नीमा एसोसिएशन के सयुंक्त तत्वावधान में हुआ संगोष्ठी का आयोजन

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ: मेदांता अस्पताल, लखनऊ और नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), लखनऊ ने हृदय रोग, स्ट्रोक और ऑस्टियोआर्थराइटिस पर एक इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोहसिन रजा (एम्एलसी,यूपी) ने सगोष्ठी का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में डॉ. राम कीर्ति सरन, निदेशक – क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, डॉ. अनूप कुमार ठाकर, निदेशक न्यूरोलॉजी और डॉ. सैफ एन शाह, निदेशक हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रमुख वक्ताओं के रूप में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में डॉ. मनोज मिश्रा, प्रेसिडेंट एनआईएमए, लखनऊ, डॉ. रवि श्रीवास्तव ट्रेजरार एनआईएमए, लखनऊ, डॉ. अलाउद्दीन सेक्रेटरी एनआईएमए की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

डॉ. राम कीर्ति सरन ने एक्यूट मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (एएमआई) के कारणों, लक्षणों और निदान के बारे में बात की, जिसे दिल का दौरा भी कहा जाता है। उन्होंने बताया, “पहले से संकुचित रक्तनालिका में संकुचन सबने ब्लड क्लिक के कारण दिल में धमनियों में से एक के अवरोध के कारण अचानक दिल का दौरा पड़ता है। कोरोनरी धमनी को कोरोनरी एंजियोप्लास्टी और कुछ ही घंटों के भीतर स्टेंटिंग के माध्यम से खोला जाना चाहिए। धमनी को खोलने में जितनी देर होगी, हृदय को उतनी ही अधिक क्षति और मृत्यु का जोखिम होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक्यूट मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (एएमआई) भारत में मृत्यु और विकलांगता का एक महत्वपूर्ण कारण है इसका शीघ्र निदान और उपचार, जीवित रहने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।”

डॉ. अनूप कुमार ठक्कर ने स्ट्रोक के कारण, लक्षण और निदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक भारत में मौत का तीसरा प्रमुख कारण है और शुरुआती निदान और उपचार से स्ट्रोक से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

डॉ. सैफ एन शाह, ने ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण, लक्षण और निदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्टियोआर्थराइटिस एक सामान्य स्थिति है जो जोड़ों को प्रभावित करती है, और इससे दर्द, जकड़न और कार्य करने में हानि हो सकती है।

इस अवसर पर डा मनोज मिश्रा(अध्यक्ष नीमा) ने मेदांता हॉस्पिटल की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा भविष्य में भी ऐसी संगोष्ठी का आयोजन किया जाना चाहिए। डा अलाउद्दीन(सचिव नीमा) ने मेदांता से आए सभी डाक्टरों को स्मृति चिन्ह व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी में 150 से अधिक डाक्टरों ने भाग लिया जिसमे डा रवि श्रीवास्तव,डा एम् आई खान डा आर सी वर्मा आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे.

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