राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (दर्शन नगर) में टीबी (क्षय रोग) के गरीब मरीजों के साथ हो रहा अन्याय

राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (दर्शन नगर) में टीबी (क्षय रोग) के गरीब मरीजों के साथ हो रहा अन्याय

(राजेश श्रीवास्तव जिला संवाददाता)

अयोध्या।राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (दर्शन नगर) में टीबी (क्षय रोग) के गरीब मरीजों के साथ कथित तौर पर बड़ा अन्याय हो रहा है।देखा जाये तो इस समय सरकार द्वारा टीबी मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने और प्रतिमाह ₹500 की आर्थिक सहायता उनके खाते में भेजने के बावजूद,यहां के टीबी एवं चेस्ट विभाग में विभागाध्यक्ष सहित कुछ डॉक्टर मोटे कमीशन के लालच में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिख रहे हैं।यहां पर आसपास के जिलों से अपना इलाज करने आने वाले मरीजों का आरोप है कि कॉलेज में ही सारी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं,फिर भी डॉक्टर जानबूझकर प्राइवेट दुकानों से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर कर रहे हैं।बताते चले कि जनपद अंबेडकर नगर से आए मरीज केदारनाथ अग्रहरी ने बताया कि उनकी टीबी की जांच के बाद डॉक्टर ने बाहर से ₹450 की दवा लिखी।उन्होंने कहा, “अगर महंगी दवा ही खरीदनी है तो सरकारी अस्पताल में आने की क्या जरूरत?” इसी तरह गोंडा जिले से आए सुजीत कुमार को तीन महंगी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं, जिनकी कीमत करीब ₹1000 आई। उनके पास पैसे नहीं थे, इसलिए भाई से ऑनलाइन पैसे मंगवाकर दवा ली। अयोध्या के ही पूरा बाजार निवासी राज नारायण को भी ₹650 की कमीशन वाली दवा बाहर से खरीदनी पड़ी।सभी मरीजों और तीमारदारों का एक ही कहना है कि डॉक्टर कमीशन के लालच में सरकारी दवाओं को नजरअंदाज कर बाहर की महंगी दवाएं थोप रहे हैं। इससे गरीब मरीजों पर दोहरा बोझ पड़ रहा है—एक तरफ बीमारी का दर्द, दूसरी तरफ आर्थिक संकट।टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मुफ्त इलाज और पोषण सहायता का प्रावधान होने के बावजूद यह स्थिति मरीजों में आक्रोश पैदा कर रही है।मरीजों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच हो और दोषी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ गरीबों तक सही तरीके से पहुंचे।यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और नैतिकता की कमी को उजागर करता है।

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