-रानी लक्ष्मीबाई राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में हो रहा महिला सफाई कर्मचारी का शोषण-प्रशासन मौन

-रानी लक्ष्मीबाई राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में हो रहा महिला सफाई कर्मचारी का शोषण-प्रशासन मौन

-आरएलबी में पुरूष मरीज का कैथेटर हटवाने से महिला सफाई कर्मचारी में रोष-

-आरएलबी में हो रहा हाईकोट के लिंगभेद आधारित ड्यूटी का खुला उल्लघन-

लखनऊ. समाज में सबसे निचले पायदान पर स्थित महिला सफाई कर्मचारियों का रानी लक्ष्मीबाई राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में शोषण किया जा रहा है।नाम न छापने की षर्त पर एक महिला सफाई कर्मचारी ने रो-रोकर अपने मानसिक उत्पीड़न की बात बताई। इसके पूर्व भी अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा महिला सफाई कर्मचारियों का षाोशण किया जाता रहा है। चिकित्सालयों के सेवा नियमो के विरूद्ध चिकित्सक, चिकित्सा अधीक्षक, मैटर्न व नर्स आदि उन पर जबरदस्ती दबाव बनाकर कार्य करवा रहे है।

ताजा मामला एक महिला सफाई कर्मचारी का है जिसमे उसकी ड्यूटी पुरूष वार्ड में लगायी गयी साथ ही उससे पुरूष मरीज का कैथेटर (पेशाब नली) हटाने का अनुचित आदेश दिया ्रगया। उसके मना करने पर उस पर मरीजों से पैसे वसूनी का आरोप भी लगा दिया। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक नीलिमा कनौजिया ने बताया कि किसी महिला सफाई कर्मचारी की ड्यूटी पुरूष वार्ड में लगायी जा सकती है परन्तु पुरूष मरीज के कैथेटर को हटाने की बात उनकी जानकारी में नहीं है।

क्या कहते है नियम-

नियमानुसार सामान्यतः राजकीय चिकित्सालयों में किसी महिला सफाई कर्मचारी की ड्यूटी पुरूष वार्ड में नही लगायी जा सकती है। क्योंकि यह गोपनीयता, गरिमा और संवेदनशीलता के आधार पर असंवैधानिक माना जा सकता है। माननीय उच्च न्यायालय ने इस तरह के मामले में पुरूष शौचालयों की सफाई के लिये महिलाओं की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुये कहा कि ऐसी जिम्मेदारी महिलाओं को सौपना उचित नहीं है। कानूनी आधार पर सफाई कर्मचारियों के लिये जेंडर आधारित ड्रेस कोड और भूमिकायें निर्धारित है जो जिंग आधारित विभाजन का संकेत देती है। इस प्रावधान में पुरूष वार्ड में महिला सफाई कर्मचारी की डयूटी का उल्लेख नहीं है परन्तु एक महिला की गरिमा को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। साथ महिला कर्मचारी की आपत्ति को भी मानवीय संवेदना के आधार देखा जाना चाहिये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *