रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

24 जनवरी: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

भरतहि होइ न राजमदु,
बिधि हरि हर पद पाइ ।
कबहुँ कि काँजी सीकरनि,
छीरसिंधु बिनसाइ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 231)
राम रामजी 🙏🙏
भैया भरत जी सेना सहित आ रहे हैं , यह समाचार कोल भीलों ने आकर श्री राम जी को सुनाया है । इस पर लक्ष्मण जी क्रोधित हो गये , श्री राम जी उन्हें समझाते हैं कि मेरा भरत ऐसा नहीं है। अयोध्या का राज तो छोड़ो ब्रह्मा, विष्णु और महादेव का भी पद पाकर मेरे भरत को राजमद नहीं हो सकता है , क्या कभी काँजी (छाछ) की बूँदों से क्षीर सागर नष्ट हो सकता है ?
आत्मीय जन ! जिसे श्री राम चरणों में प्रीति हो जाती है, जिसे श्री राम पद का दर्शन हो जाता है फिर उसे कोई मद नहीं होता है । वह तो श्री रामपद में ही मस्त रहता है । अथ….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

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