राष्ट्रपति ने एम्स गोरखपुर के पहले दीक्षांत समारोह में छात्रों को दी उपाधियाँ
ब्यूरो चीफ आशुतोष चौधरी
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के पहले दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने प्रथम बैच के छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने एम्स को भारत की चिकित्सा क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यहां की सेवाएं देश के साथ-साथ विदेशों तक प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का मार्ग है। डॉक्टरों की सहानुभूति एवं समर्पण रोगी के शीघ्र उपचार में सहायक होते हैं। उन्होंने सभी नवप्रशिक्षित डॉक्टरों से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में सेवा देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत में चिकित्सा तकनीक—जैसे रोबोटिक सर्जरी व एआई आधारित कैंसर डिटेक्शन—तेजी से विकसित हो रही है और एम्स गोरखपुर इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि किसी भी संस्थान की स्थापना में किसानों के बलिदान को न भूलें। उन्होंने भूमि देने वाले किसानों के सम्मान और सेवा की बात कही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वांचल की स्वास्थ्य सुविधाओं में एम्स ने क्रांतिकारी बदलाव किया है। वर्ष 2014 से पूर्व इंसेफ्लाइटिस के कारण हजारों बच्चों की मौत होती थी, पर आज यह रोग लगभग समाप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री ने एम्स को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल तक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बताया।
केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एम्स गोरखपुर देश के चिकित्सा क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हुई है। उन्होंने डॉक्टरों से सेवा, संवेदनशीलता और मानवता की भावना के साथ कार्य करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर एम्स अध्यक्ष देश दीपक वर्मा, कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता सहित कई मंत्रीगण और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

