07.05.2055
निशिचर हीन करउं महि भुज उठाइ पन कीन्ह।।
श्री राम चरित मानव की भाव सहित चौपाई
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भगवान श्री राम अपने वन वास यात्रा में सभी वैज्ञानिकों, विद्वानों, ज्ञानियों, ऋषियों, मुनियों आदि सभी सनातन संस्कृति धर्म रक्षकों से सम्पर्क करके उनकी स्थिति की जानकारी ली। सनातन संस्कृति धर्म के रास्ते में आ रहे विघ्न बाधाओं का अध्ययन एवं व्यावहारिक अनुभव किया।
आगे बढ़ने पर एक बड़ा पहाड़ दिखाई दिया जो हड्डियों का था। पूछने पर अवगत कराया गया कि सभी सनातनी रक्षकों, अध्ययन शीलों, वैज्ञानिकों, मुनियों को राक्षसों, असुरों, तथा दैत्यों ने मार कर भोजन बना लिया है। सनातन संस्कृति धर्म को जड़ से नष्ट-भ्रष्ट करने का प्रयास किया है
भगवान श्री राम के आंखों में अश्रु धारा बहने लगी।
दूसरे क्षण ही कठोरतम कार्यवाही हेतु इक्ष्वाकु वंश के प्रतिनिधि होने के कारण प्रतिज्ञा करते हैं।
अब सारी पृथ्वी को राक्षसों से बिहीन कर दूंगा।
जय श्री राम

