15 जनवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
राम बिमुख संपति प्रभुताई ।
जाइ रही पाई बिनु पाई ।।
सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं
बरषि गएँ पुनि तबहिं सुखाहीं ।।
( सुंदरकांड 22/3)
राम राम🙏🙏
हनुमान जी को मेघनाद नागपाश में बांधकर रावण के दरबार ले आया है । रावण हनुमान जी से कुछ प्रश्न पूछता है । हनुमान जी उसका उत्तर देते हैं । वे आगे कहते हैं कि राम जी से विमुख रहने वाले की संपत्ति व प्रभुता रहती हुई भी चली जाती है । उसका पाना न पाने के बराबर है , ठीक उसी तरह से जैसे जिन नदियों का अपना जल स्रोत नहीं होता है वह बरसात में तो दूसरों के जल से भरी रहती हैं पर जैसे ही वर्षा बीतती है वे सूख जाती हैं ।
हमारी संपति व प्रभुता की निरंतरता हमारे मूल स्रोत पर निर्भर है । जिन्होंने अपना मूल स्रोत राम जी को बना रखा हैं वहाँ तो ये दोनों निरंतर विद्यमान रहती हैं अन्यथा जिन्होंने अपना स्रोत राम जी से इतर बनाया हुआ है वहाँ इनका वास अल्पकालिक होता है और उनकी आगे की गति रावण की तरह हो जाती है । अस्तु सुख संपदा की सततता हेतु अपने जीवन में राम जी को मूल में रखें और निरंतर फूले फलें । अतएव ! जय जय राम, जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

