श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

17 जनवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं ।
दूसर हेतु तात कछु नाहीं ।।
सकल सुकृत कर बड फलु एहू
राम सीय पद सहज सनेहू ।।
( अयोध्याकाण्ड 74/2)
राम राम 🙏🙏
राम जी द्वारा लक्ष्मण से वन साथ चलने के लिए कहने पर लक्ष्मण जी सुमित्रा माँ से आज्ञा लेने आते हैं , वे सब बताते हैं । माँ कहती हैं कि राम जी तुम्हारे भाग्य से ही वन को जा रहें हैं । वन जाने का दूसरा कोई अन्य कारण नहीं है । समस्त पुण्यों का सर्वश्रेष्ठ फल सीताराम जी के चरणों में सहज प्रेम होना है ।
सुमित्रा जी कहती हैं कि समस्त पुण्यों का फल राम चरणों में सहज प्रेम होना है । क्या हम आप सहज ही राम चरणों के प्रेमी हैं ? हमें आपको तो रोज़ राम प्रेम करने के लिए कहा जाता है तब जाकर हम आप कहीं राम जी में लगते हैं । सहज राम प्रेम तो पुण्य कर्मों से आता है। पुण्य कर्म तो परहित व दान देना हैं । हम कितना परहित व दान देते हैं ? विचार करें । अतएव परहित व दान बढ़ाकर अपने में राम प्रीति सहज ही उपजाएँ । अथ ! जय जय राम , जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी, लखनऊ

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