18 जनवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
सुनु खगेस हरि भगति बिहाई ।
जे सुख चाहहिं आन उपाई।
ते सठ महासिंधु बिनु तरनी ।
पैरि पार चाहहिं जड. करनी ।।
( उत्तरकांड 114/2)
राम राम 🙏🙏
गरुड़ महराज को अपने कौआ होने की कथा सुनाने के बाद काकभुसुंडि जी कहते हैं कि हे पक्षिराज ! सुनिए, जो लोग भगवान की भक्ति छोड़कर दूसरे उपायों से सुख पाना चाहते हैं वे लोग मूर्ख व जड़ करनी वाले हैं तथा ऐसे लोग बिना जहाज़ के तैरकर महासागर के पार जाना चाहते हैं ।
हम सब सुखी होना चाहते हैं । सुख के अनेकानेक सामान व साधन अपनाने के बाद भी हम आप सुखी नहीं हो पाए हैं तो इसका कारण यह है कि वास्तविक सुख इन उपायों में नहीं बल्कि परमात्मा की भक्ति करने में है। अन्य साधन से सुख प्राप्त करने की हमारी लालसा केवल हमें आपको ब्यर्थ श्रम में लगाती है जिसका कोई परिणाम नहीं निकलता है । अतएव वास्तव में आप सुखी होना चाहते हैं तो भगवत भक्ति करें , राम जी की भक्ति करें । अथ ! राम राम जय जय सुखधाम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

