19 फरवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
रस रस सूख सरित सर पानी ।
ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी
जानि सरद रितु खंजन आए ।
पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।
( किष्किंधाकांड 15/3)
राम राम 🙏🙏
बालि का बध कर तथा सुग्रीव को राजा बनाकर राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षन पर्वत पर निवास कर रहें हैं । लक्ष्मण जी को वे ऋतु वर्णन करते हुए कहते हैं कि वर्षा बीत जाने पर नदियों, तालाबों का जल धीरे धीरे सूख रहा है जैसे ज्ञानी ब्यक्ति ममता का त्याग करते हैं । शरद ऋतु आ गई है ऐसा जानकर खंजन पक्षी दिखाइ दे रहे हैं जैसे समय आने पर पुण्य प्रकट हो जाते हैं ।
अपने पुण्य हम तभी प्रकट मानें जब आपका मन राम प्रेम करने लगे , राम जी में रमने लगे , राम कथा सुनने लगे तभी अपना समय अनुकूल मानें अन्यथा राम गुणगान कर अपने पुण्य बढ़ाएं अस्तु जय पतित पावन राम , जय पतित पावन राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

