10 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
चंदु चवै बरु अनल कन,
सुधा होइ बिषतूल ।
सपनेहुँ कबहुँ न करहिं किछु, भरतु राम प्रतिकूल ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 48)
जय जय सियाराम🙏
कैकेई जी ने श्री दशरथ जी से श्री राम जी को वन व श्री भरत जी के लिए राज माँग लिया है । सभी दुखी हैं, कोई कहता है कि इसमें श्री भरत जी की सहमति है। अयोध्या के लोग कहते हैं कि चंद्रमा चाहे आग बरसाने लगे और अमृत चाहे बिष के समान हो जाए परंतु श्री भरत भैया श्री राम जी के बिरुद्ध स्वप्न में भी कुछ प्रतिकूल न सोच सकते हैं न ही नहीं कर सकते हैं।
आत्मीय जन ! जो श्री राम प्रेमी होता है वह अन्य लोग चाहे जैसा भी आचरण करें फिर भी वह किसी का अहित नहीं कर सकता है, वह श्री राम जी के द्वारा बताए गये धर्म सापेक्ष आचरण के बिरुद्ध कुछ भी नहीं करता है । श्री भरत जी, श्री राम जी के बताए आदर्श व धर्माचरण की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं, वे केवल और केवल निस्वार्थ प्रेम करते हैं, अतः श्री भरत भैया जी जैसा श्री सीताराम प्रेमी बनें, यही इस जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए केवल एक ही सर्वोत्तम साधन है श्री सीताराम नाम का सतत भजन…श्री भरत भैया जी की जय ! श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

