श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

28 दिसम्बर- श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

निज कृत कर्म जनित फल पायउँ
अब प्रभु पाहि सरन तकि आयउँ
सुनि कृपाल अति आरत बानी ।
एकनयन करि तजा भवानी ।।
( अरण्यकांड 1/7)
राम राम 🙏🙏
राम कथा सुनाते हुए शिव जी पार्वती से कहते हैं कि चित्रकूट में राम जी ने एकबार अपने हाथों सीता जी का श्रृंगार कर रहे थे । इंद्र पुत्र जयंत भगवान के बल की थाह लेने के लिए काक वेश धारण कर सीता जी के चरणों में चोंच मार कर भाग चला । राम जी ने सरकंडे का बाण उस पर छोड़ दिया । वह सबके पास मदद के लिए गया पर किसी ने उसे बैठने तक के लिए भी नहीं कहा । नारद ने ब्याकुल जयंत को राम जी के पास भेजा है । जयंत आता है, राम जी से अपनी रक्षा की गुहार लगाता है । वह कहता है कि प्रभु! मैंने अपने किए का फल पा लिया है , अब मेरी रक्षा कीजिए ।जयंत की वाणी सुनकर पार्वती! राम जी ने उसे एक आँख से हीन कर छोड़ दिया ।
हम आप भी तो इस संसार में अनेकों अपराध कर जयंत की तरह ही घूम रहे हैं , अपने कर्मों का फल भोग रहें हैं लेकिन राम शरण नहीं ले रहें हैं । जितनी जल्दी राम शरण का वरण हम कर लेंगे उतना जल्दी ही राम जी हमें आपको भी ठीक कर देंगे । अस्तु! शरण लेने में देर न करें ! अथ ! जय जय राम शरण , जय सियाराम शरण 🚩🚩🚩
संकलन कर्ता तरुण जी लखनऊ

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