23 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
मम गुन गावत पुलक सरीरा ।
गद्गद गिरा नयन बह नीरा ।।
काम आदि मद दंभ न जाकें ।
तात निरंतर बस मैं ताकें ।।
( अरण्यकांड 15/6)
जय सियाराम 🙏🙏
श्री लक्ष्मण जी द्वारा पंचवटी में श्री राम जी से भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के बारे में पूछने पर श्री राम जी कहते हैं कि मेरा गुणगान करते समय जिसका शरीर पुलकित हो जाता हो , वाणी गदगद हो जाए, नेत्र अश्रुपूर्ण हो जाएँ, काम, क्रोध, लोभ, मद , मत्सर आदि जिसमें न हो, लक्ष्मण ! मैं सदा उसके वश में रहता हूँ ।
आत्मीय जनों! श्री राम जी ने जो जो श्री लक्ष्मण जी से कहा उसे अपने में खोजें, यदि वो सभी सत्व गुण अपने में नहीं है तो मन लगाकर श्री सीताराम गुणगान करें तथा सतत नाम भजन करते रहें जिससे ये सब लक्षण हममें आ जाएँ और राम जी की कृपा हमें मिल जाएँ । अथ ! श्री राम जय राम जय राम , सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम जय रघुनंदन जय सियाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम
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