14 अक्टूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
भगति पच्छ हठि करि रहेउँ
दीन्हि महारिषि साप ।
मुनि दुर्लभ बर पायउँ
देखहु भजन प्रताप ।।
( उत्तरकांड, दो. 114)
राम राम 🙏🙏
काकभुसुंडि जी गरुड़ जी को अपने काक शरीर पाने के बारे में बताते हुए कहते हैं कि मैं हठ करके भक्ति के पक्ष में अड़ा रहा , जिससे लोमश ऋषि ने मुझे कौआ होने का श्राप दिया परंतु मेरे आग्रह पर श्री राम भक्ति का वरदान दिया। मुनियों को भी जो दुर्लभ है ,वह वरदान मैंने पाया , यह भजन का प्रताप है । इसे समझिए ।
आत्मीय जन! काकभुसुंडि जी ने सगुण भक्ति के बारे में लोमश ऋषि से बारंबार पूछा है परिणाम में श्री राम भक्ति उन्हें प्राप्त हुई । भजन, दुर्लभ से दुर्लभ परिस्थितियों को भी जीवन में सुलभ बना देता है बस निरंतर भजन होना चाहिए । अस्तु….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

