18 अक्टूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नाना बिधि बिलाप कर तारा ।
छूटे केस न देह सँभारा ।।
तारा बिकल देखि रघुराया ।
दीन्ह ग्यान हरि लीन्ही माया ।।
( किष्किंधाकांड 10/1-2)
राम राम जी 🙏🙏
श्री राम जी ने बालि को मारकर उसे अपने धाम भेज दिया है । बालि की पत्नी अनेकों प्रकार से बिलाप करती है, उसे अपने शरीर तक का भी ध्यान नहीं है । तारा को बिकल देखकर श्री राम जी ने उसे ज्ञान दिया है और उसका अज्ञान (माया) दूर कर दिया ।
बंधुवर ! जब तक आप अज्ञान में कल (आराम) से हैं तब तक श्री राम जी कुछ नहीं करते हैं , जब आप अज्ञान में व्याकुल होते हैं अथवा (कष्ट) पाते हैं और ज्ञान प्राप्ति के लिये दीन भाव से अत्यन्त व्यग्र होते हैं तभी श्री राम जी कृपा करते हैं। अतः सदा श्री राम (ज्ञान स्वरूप) के साथ रहें और प्रतिपल श्री सीताराम नाम का भजन करते रहें। अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

