18 दिसंबर.श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जनकसुता जग जननि जानकी।
अतिशय प्रिय करुनानिधान की।
ताके जुग पद कमल मनावउँ।
जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।
( बालकांड 17/4)
राम राम जी 🙏
श्री मानस जी के आरंभ में सबकी वंदना कर लेने के बाद पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज माता सीता जी की वंदना करते हुए कहते हैं कि श्री जनक जी की पुत्री, जगत जननी और श्री रामजी की प्रिया श्री जानकी जी के चरण कमलों की वंदना करता हूँ जिनकी कृपा से मुझे निर्मल बुद्धि प्राप्त होगी ।
आत्मीय जन ! हमारी बुद्धि ही तो ठीक नहीं है तथा बुद्धि सात्विक और श्री सीताराम जी के सापेक्ष न होने से सब कुछ हमारे विपरीत है। अतः अपनी मलिन बुद्धि को निर्मल तथा श्री सीताराम जी के सापेक्ष करना है तो श्री राम प्राण वल्लभा एवं श्री राम प्रिया सीता जी के युगल श्री चरणों की सेवा करें, इसके लिए केवल श्री सीताराम नाम का भजन निरन्तर करते रहें। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

