28 दिसंबर.श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं।
जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।
भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी।
रामु पुनीत प्रेम अनुगामी ।।
( अयोध्याकाण्ड, 3/4)
राम राम जी 🙏🙏
श्री राम जी के विवाह के कुछ दिनों बाद महाराज दशरथ जी गुरुदेव वशिष्ठ के पास जाते हैं और श्री राम को युवराज बनाने की अनुमति मांगते हैं। गुरुदेव वशिष्ठ जी कहते हैं कि राजन ! सुनिए, जिससे विमुख होकर लोग पछताते हैं, जिसके भजन बिना हृदय को शांति नहीं मिलती है, वही तीनों लोकों के मालिक श्री राम जी आपके पुत्र हुए हैं जो पवित्र प्रेम का अनुगमन (पीछे चलना) करते हैं ।
बंधुवर ! श्री राम जी को प्रेम पसंद है जबकि हम आप संसार के असार वस्तुओं और जीवों को प्रेम करते हैं, जिससे हमारा प्रेम श्री राम जी से नहीं हो पाता है इसलिए वे हमारा अनुगमन नहीं करते हैं । बस हम सभी का जीवन संसार के लोभ मोह के बंधनों में जकड़े होने कारण किसी प्रकार घिसट घिसट कर चल रहा है। यदि अपने जीवन में शांति चाहते हैं तथा जीवन को सार्थक करना चाहते हैं तो श्री राम सनमुख होकर श्री राम जी का सतत भजन करें, भजो रे मन प्रेम से राम रघुरईया, राम रघुरईया। अथ ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

