31 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय
त्रिजटा नाम राक्षसी एका ।
राम चरन रति निपुन बिबेका ।।
सबन्हौ बोलि सुनाएसि सपना ।
सीतहि सेइ करहु हित अपना ।।
( सुंदरकांड 10/1)
राम राम 🙏🙏
अशोक वाटिका में हनुमान जी छोटा सा रूप धारण कर पहुँचे हैं , उसी समय रावण आता है , सीता जी को प्रलोभन देता है, माँ उसे दुत्कारती है । रावण एक माह का समय देकर निसाचरियो से उन्हें डराने के लिए कह कर चला जाता है । निसाचरियां सीता जी को डराती हैं । उन्हीं में त्रिजटा नाम की राक्षसी हैं उनकी राम चरणों में प्रीति है । उसने निसाचरियो को बुलाया , अपना स्वप्न सुनाया और कहा कि सीता जी की सेवा कर अपना कल्याण कर लो ।
सीता जी जगत जननी हैं , सीता जी भक्ति हैं , उनकी सेवा से मति निर्मल होती है , मति निर्मल होने पर राम प्रियता , राम समीपता मिल जाती है , राम समीपता मिलते ही हमारा कल्याण सुनिश्चित हो जाता है । अथ ! आत्म कल्याण हेतु , सीताराम जय सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

