8 अप्रैल – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
तात कुसल कहु सुखनिधान की
सहित अनुज अरू मातु जानकी
कपि सब चरित समास बखाने
भए दुखी मन महुँ पछिताने ।।
अहह दैव मैं कत जग जायउँ
प्रभु के एकहु काज न आयउँ ।।
( लंकाकांड 59/1-2)
राम राम 🙏🙏
लंका युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी को शक्ति लगी है । लक्ष्मण जी मूर्छित हैं । सुषेन वैद्य ने औषधि बताई है , हनुमान जी उसे लेकर वापस आ रहें हैं । अयोध्या में भरत जी ने रात्रि होने के कारण निसिचर जानकर हनुमान जी को बिना फ़र का बाण मारा है । हनुमान जी मूर्छित हो जाते हैं , राम प्रेम की दुहाई देने पर हनुमान जी जगते हैं । भरत जी उनसे राम लखन व सीता का हाल पूछते हैं । हनुमान जी ने सब बताया है , भरत दुखी होते हैं तथा पछताते हैं । वे सोचते हैं कि हे बिधाता ! मेरा इस जगत में जन्म क्यों हुआ? मैं प्रभु के एक भी काम में अपना सहयोग न दे सका हूँ ।
एकतरफ भरत जी हैं जो सोचते हैं कि मैं प्रभु के एक भी काम न आ सका तथा दूसरी तरफ़ हम आप हैं जो दिन भर यही सोचते रहते हैं कि प्रभु हमारा एक भी काम नहीं कर रहें हैं । इसीलिए हमारी यह गति है । अस्तु राम प्रेम चाहते हैं तो प्रभु के काज में अपने को लगा दें अतएव सीताराम जय सीताराम 🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

