01 मई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई ।
जस थोरेहुँ धन खल इतराई ।।
भूमि परत भा ढाबर पानी ।
जनु जीवहि माया लपटानी ।।
( किष्किंधाकांड 13/3)
राम राम 🙏🙏
राम जी ने बालि को मार कर सुग्रीव को राजा बना दिया है और स्वयं वर्षा ऋतु में प्रवर्षन पर्वत पर विश्राम कर रहें हैं । वर्षा का वर्णन करते हुए वे लक्ष्मण से कहते हैं कि वर्षा के कारण छोटी नदियाँ अपने किनारों को तोड़ कर बह रही हैं जैसे थोड़ा धन मिलने पर दुष्ट अमर्यादित हो जाते हैं । पृथ्वी पर पड़ते ही पानी मलिन हो जा रहा है जैसे शुद्ध जीव माया से लिपट कर मलिन हो जाता है ।
हम सब माया से लिपट कर मलिन हो गये हैं पर माया छोड़ मायापति अर्थात् राम से लिपट जाएँ तो स्वच्छ व शुद्ध हो सकते हैं । अत: माया नहीं मायाधीश राम से लिपट कर शुद्ध व बुद्ध बनें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

