आचार्य श्री भिक्षु का 300 वाँ जन्म दिवस एवं 268 वाँ बोधि दिवस –
भाग-1
तेरापन्थ के आद्यप्रवर्तक क्रांतिकारी आचार्य श्री भिक्षु को मेरा कोटिशः वन्दन । आचार्य श्री भिक्षु जैसे महापुरुष होते है जो सभी बाधाओं व संघर्षों को चीरकर आगे बढ़ते है, कंटीले रास्तों के बीच भी निर्भीकता से शिखर पर चढ़ते है , बाधाओं के आगे कभी भी हार नहीं मानते है, विजय के संकल्पों को पूरा करने की पक्की ठानते हैं , वह तर्क संगत सत्य के प्रति दृढ़ निश्चयी होते है , वह झुकते नहीं, वह रुकते नहीं निर्भय हों सत्पथ पर
बढ़ चलते हैं , उन्हें कोई भय शास्त्रोक्त वर्णित सुपथ पर चलने से नहीं डिगा सकता हैं आदि – आदि । ऐसे गुणों से भरपूर महापुरुष आचार्य श्री भिक्षु को उनके 300 वाँ जन्म दिवस एवं 268 वाँ बोधि दिवस पर मेरा भावों से शत- शत नमन ! वन्दन । वह हम सब उनकी तरह अपने जीवन में हर पल हर क्षण ऊर्ध्वगमन करते रहें | भिक्षु स्वामी ने उस समय आचार्य श्रुघनाथ जी के निर्देशानुसार राजनगर के श्रावकों को अपनी बुद्धिकुशलता के चातुर्य से समझाने की अपनी कार्यदक्षता कार्यकुशलता आदि से सम्पन्नता पर रात को दाह ज्वर की वेदना होने पर भी भीखण जी की आत्मा को झकझोर देने वाले चिंतन का मंथन से ही उस समय तेरापन्थ के बीज बोने का नवनीत प्राप्त हुआ है । वह आज हम सबके सामने वटवृक्ष बनकर तेरापन्थ धर्मसंघ में जान फूंक रहा है।हम सबके चिंतन में भी प्रत्येक पल उसी सत्य का साक्षात्कार हो एवं हम अपनी आत्मा को उनके पदचिन्हों पर चलकर ही उज्ज्वल बनाने का लक्ष्य रखें तो हम उनके सच्चे प्रतिनिधि अपने को कह सकेंगे । आचार्य श्री भिक्षु का जन्म एवं बोधि दिवस यहाँ इस युग में एक ऐसे महापुरुष का पादुर्भाव हुआ जिसने ऐसा पथ दिखलाया कि हर दिन ही आनंदोत्सव हैं । यह उनके जीवट की कहानी और बलिदानों की गौरव गाथा है । वह वीर भिक्षु के दृढ़ संकल्प व
क्रमशः आगे ।
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ )

