भारत की आज़ादी में सुभाष चंद्र बोस के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता:अम्बरीष
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। हरदोई के नेहरू म्यु. कन्या इंटर कालेज में तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा, दिल्ली चलो, और जयहिंद जैसे क्रांतिकारी उद्घोषों से करोड़ों भारतीयों के हृदय में स्वाधीनता की लौ प्रज्जवलित करने वाले नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जी की 128 वी जयंती पराक्रम दिवस के रूप में प्रधानाचार्या नूरुल हुमा द्वारा नेता जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर छात्राओं शिक्षिकाओं द्वारा पुष्पांजलि दे कर शत् शत् नमन करते हुए धूमधाम से मनाई गई।
विषय विशेषज्ञ अम्बरीष कुमार सक्सेना ने नेता सुभाष चन्द्र बोस का व्यक्तित्व एवं कृतित्व बताया कि नेता जी का जन्म उड़ीसा राज्य के कटक में 23 जनवरी 1897 को हुआ था। नेता जी स्वाधीनता आंदोलन में गरम दल के स्वतन्त्रता सेनानी थे।उनके नारा था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।उनका विचार था कि तन,मन, से देश की आजादी के लिए प्रति सभी देशवासी जागरूक हों। नेता जी 1920 में आई सी एस परीक्षा दी। जिसमें चौथे स्थान पर रहे। लेकिन एक साल बाद ही स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गए और नौकरी छोड़ दी। सन् 1943 में उन्होंने आजाद हिन्द फौज की स्थापना की। जिसमें इटली, जापान, चीन सहित 09 देश शामिल हुए।श्री सक्सेना ने कहा कि नेता सुभाष चन्द्र बोस ने अपनी प्रतिभा, त्याग और सर्वस्व न्यौछावर करने की भावना से देश विदेश को प्रभावित भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया। हम सबको नेता जी पदचिन्ह पर चलते हुए देश के प्रति जागरूक होना चाहिए।
श्री सक्सेना ने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जी से सम्बंधित जोर दार नारे लगवाए। इस अवसर पर पुष्पांजलि श्रीवास्तव, भैरवी अग्निहोत्री, आयशा परवीन, वैशाली यादव, ऊषा देवी,वर्तिका शुक्ला, नायाब जहाँ,जिया खान, निरूपा, रेशमा, सूचित, अजय, सोनी एवं ताइक्वान्डो
प्रशिक्षक मो. तैय्यब खां सहित सभी छात्राएं मौजूद रहीं।

