महावीर जयंती के उपलक्ष्य में सर्वधर्मीय संवाद सम्पन्न शांति , सौहार्द के बिना विकसित राष्ट्र का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता – राज्यपाल

महावीर जयंती के उपलक्ष्य में सर्वधर्मीय संवाद सम्पन्न
शांति , सौहार्द के बिना विकसित राष्ट्र का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता – राज्यपाल
बिपिन गुप्ता मुंबई महाराष्ट्र ब्यूरो चीफ
मुंबई, 9 अप्रैल – समाज में शांति और सौहार्द का वातावरण रहे बिना विकसित राष्ट्र का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। सर्वधर्मीय संवाद के माध्यम से एक-दूसरे के प्रति मौजूद पूर्वाग्रह दूर होंगे और समाजों के बीच की दूरी मिटेगी, ऐसा मत राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने व्यक्त किया। पु. ल. देशपांडे अकादमी, मुंबई में लोकमत मीडिया ग्रुप और अहिंसा विश्व भारती द्वारा संयुक्त रूप से महावीर जयंती के अवसर पर “सर्वधर्मीय संवाद के माध्यम से वैश्विक शांति और सौहार्द” विषय पर परिसंवाद का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल राधाकृष्णन ने विचार व्यक्त किए।
राज्यपाल ने कहा कि सर्वशक्तिमान ईश्वर के समक्ष सभी धर्म समान हैं। इसलिए हमें सभी धर्मों और प्रार्थना की पद्धतियों का सम्मान करना चाहिए। महाराष्ट्र संतों की भूमि है और यहाँ के संतों ने वेदों के ज्ञान को आम जनता तक पहुँचाया है। भारत ने प्राचीन काल से सभी धर्मों का स्वागत किया है। भारत में चार प्रमुख धर्मों की उत्पत्ति हुई और पारसी, यहूदी, मुस्लिम जैसे किसी भी समुदाय के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया। आने वाली पीढ़ियों को बहुधर्मी और बहुसांस्कृतिक समाज में रहना होगा, इसलिए उन्हें सभी धर्मों और पंथों का सम्मान करना सिखाना चाहिए। इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में सभी धर्मों के त्योहार मनाए जाने चाहिए और विद्यार्थियों को विभिन्न धर्मों के पूजास्थलों की यात्रा पर भी ले जाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जैसे प्राकृतिक विविधता स्वाभाविक है, वैसे ही विचारों में मतभिन्नता भी स्वाभाविक है। हमें इस विविधता को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही इसके पीछे की शाश्वत एकता को तलाशने का प्रयास भी करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पूरा संसार एक ही परमात्मा का प्रतिरूप है। इसलिए “केवल मेरा ही धर्म सत्य है” ऐसा घमंड किसी को नहीं होना चाहिए। सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए, यही सच्चा मार्ग है, ऐसा राज्यपाल खान ने स्पष्ट किया।
लोकमत समूह के अध्यक्ष विजय दर्डा ने कार्यक्रम का प्रारंभिक भाषण दिया।

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