राजभवन बिहार में रचनात्मक साथी जयेश_अनार का भव्य स्वागत
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। इस देश में अगर कोई संस्था जगत या रचनात्मक परिवार में कार्यरत है तो जयेश भाई एक ऐसा नाम बन चुका है जिसे हर कोई जानता है और जाने भी क्यों न,क्योंकि बापू के साबरमती आश्रम अहमदाबाद के ट्रस्टी, पर्यावरणीय स्वच्छता संस्थान सुघड़ के निदेशक सफाई विद्यालय के अध्यक्ष और गुजरात हरिजन सेवक संघ जिसके 17 छात्रावास गुजरात में चलते हैं जिसमें 2500 से अधिक छात्र छात्राएं प्रतिवर्ष पढ़ाई करते हैं उस संघ के अध्यक्ष , विनोबा विचार प्रवाह परिवार के भी मित्र हैं। जयेश भाई के सामाजिक जीवन की शुरुआत यू एस ए में करते हुए काम को बाय बाय कहकर आने पर हुई।पूज्य पिता जी गांधी जी के परिवार का सफाई के क्षेत्र में एक बड़ा नाम पद्मश्री ईश्वर भाई पटेल जिन्होंने जयेश भाई को अपनी संस्था में पहला अनुबंध 125 टॉयलेट साफ करने का दिया । फिर संस्था के बड़े कामों को संभालना शुरू किया।आज जयेश जिस मुकाम पर हैं वह ग्राफ सफाई आयोग भारत सरकार के चेयरमैन ईश्वरभाई जी के काम की ऊंचाई का अनुमान कराता है। अनार बेन शिक्षा दीक्षा अहमदाबाद में हुई और स्ट्रीट चिल्ड्रन की पढ़ाई के लिए चिंतित होकर उनके लिए अनेक स्कूल सेवा साधना के माध्यम से शुरू किए। जो महिलाएं बच्चे कूड़ा बीनकर अपना जीवन यापन करते उनके जीवन रहना सहन में आमूल चूल परिवर्तन लाने का बीड़ा उठाया। उनको मजदूरी ज्यादा पड़े उसके लिए उसको अलग अलग करने की व्यवस्था इनके आवास के पास करवाने से लेकर सभी के लिए सुंदर मकान बच्चों के।लिए स्कूल, उनके बीने गए सामान को पेंट कर वैल्यू एडेड का बड़ा विपणन केंद्र खुला। फिर जो संस्था ग्राम श्री अनार बेन की मां आनंदीबेन पटेल ने सामाजिक पृष्ठभूमि से शुरू की थी उसके माध्यम से गांव में जो कारीगर है उसके जीवन में बदलाव लाना और उनके उत्पाद की बिक्री के लिए देश भर में ग्रामश्री मेले आयोजित करना जिसमें एक से दो करोड़ औसतन बिक्री का आंकड़ा पहुंचता है। जिसका बड़ा लाभ हस्त महिला कारीगरों के हांथ में जाता है। अभी उनका आगे का सपना है कि दुनिया का पहला विश्वविद्यालय यथाशीघ्र उनकी संस्था क्राफ्टरूट शुरू करे। जिसमें भारत की ऐसी कोई कला न अवशेष न बचे जिसकी पढ़ाई उस लीलापुर परिसर में न हो। अनार बेन के जीवन का एक एक पल इन्हीं संघर्ष शील जीवन में बीत रहा है। अभी हाल ही में उन्हें पटना में सुजाता बहन की पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में राजभवन बिहार आना हुआ लेकिन वह भागलपुर साहेबगंज या और तमाम स्थानों पर जहां मंजूषा कला और मधुबनी कला के कारीगर काम कर रहे हैं उन सभी गांवों में जाकर संपर्क की हैं। बिहार में चूंकि अनेक इस प्रकार की बुनाई की कलाएं हैं इसलिए अनार बेन का बा बापू सेवा ट्रस्ट के साथ अटूट रिश्ता जुड़ने वाला है। सुजाता बहन का ऐसे तमाम कारीगरों से जान पहचान है जिन्हें अपने उत्पाद की विपणन की जरूरत है। ऐसे वर्ग के लिए यह मित्रता लाभप्रद बने। जयेश भाई_ अनार बेन दंपति का भव्य स्वागत रास बिहारी मिशन बा बापू सेवा ट्रस्ट और विनोबा विचार प्रवाह परिवार की ओर से बिहार राजभवन पटना के दरबार हॉल के मंच पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा मंजूषा कला के अंगवस्त्र पेंटिंग और सुजाता बहन की पुस्तकों को भेंटकर किया गया। दोनों शख्सियत अनार जयेश एक साथ कम ही कार्यक्रमों में देखे गए हैं लेकिन यहां सौम्य सुजाता बहन की पुस्तक का लोकार्पण अवसर और माननीय राज्यपाल महोदय का स्नेह और विनोबा विचार प्रवाह से लगाव इस त्रिवेणी को जाता हैं। जयेश भाई अनार बेन को दुनिया के तमाम पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। अनार बेन को तो इस बात की पदवी मिल चुकी है कि तीस हजार बहनों का जीवन बदलने का टैग उनके साथ है। वह कॉरपोरेट सेक्टर को इन गरीब बहनों के बीच में सेवा के लिए लगाने का कार्य कर रही हैं।

