02 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
अरथ न धरम न काम रूचि गति न चहउँ निरबान ।
जनम जनम रति राम पद यह बरदानु न आन ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 204)
राम राम 🙏🙏
भरत जी माताओं, गुरू वशिष्ठ व अयोध्या के समाज के साथ राम जी से मिलने चित्रकूट जा रहें हैं । वे रास्ते में प्रयाग पहुँचते हैं , त्रिवेणी जी में स्नान करते हैं और त्रिवेणी जी माँगते हैं कि मुझे धर्म अर्थ व काम की इच्छा नहीं है , न ही मैं मोक्ष चाहता हूँ । मेरा जन्म जन्म राम चरणों में प्रेम हो , यही वरदान आपसे माँगता हूँ अन्य कुछ नहीं मुझे चाहिए ।
हमारा राम चरणों में प्रेम इसलिए नहीं होता है कारण हमें सब कुछ चाहिए होता है परंतु यदि आप राम चरणों में प्रेम पाने की इच्छा रखते हैं तो केवल व केवल राम चरण ही चाह कर पूरी की जा सकती है । अथ ! जय जय राम चरन , जय राम चरन 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

