श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

9 अगस्त-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई ।
जस थोरेहुँ धन खल इतराई ।।
भूमि परत भा ढाबर पानी ।
जनु जीवहि माया लपटानी ।।
( किष्किंधाकांड 13/3)
राम राम 🙏🙏
सीता जी को खोजते हुए राम जी की भेंट सुग्रीव से होती है । बालि को मार कर सुग्रीव को उन्होंने राजा बना दिया है तथा वर्षा ऋतु में स्वयं प्रवर्षन पर्वत पर निवास करते हैं । लक्ष्मण को वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए वे कहते हैं कि छोटी नदियाँ पानी भर जाने के कारण अपने किनारों को तोड़ कर बह रही है जैसे थोड़ा घन पाने पर दुष्ट अमर्यादित आचरण करने लगते हैं । पृथ्वी पर पड़ते ही पानी मटमैला हो कर वैसा ही लगता है जैसे शुद्ध जीव के माया लिपट गई हो ।
जगत का थोड़ा धन मिलने पर दुष्ट जीव मर्यादा त्याग देते हैं जबकि राम धन मिलने पर जीव और मर्यादित हो जाता है उसी तरह जीव जब अपने को राम जी के साथ जोड़ लेता है तो वह कैसा भी हो निर्मल व स्वच्छ हो जाता है । अस्तु! राम जी से जुड़े , राम जी से लिपटे , शुद्ध व बुद्ध बनें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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