14 जुलाई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
भूमि जीव संकुल रहे
गए सरद रितु पाइ ।
सदगुर मिलें जाहिं जिमि
संसय भ्रम समुदाइ ।।
( किष्किंधाकांड, दो . 17)
जय जय सीताराम 🙏
वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर वास करते हुए श्री राम जी श्री लक्ष्मण से कहते हैं कि वर्षा ऋतु के कारण पृथ्वी पर जो जीव भर गये थे, वे शरद ऋतु के आने पर वैसे ही नष्ट हो जाते हैं जैसे सद्गुरु के मिलने पर जीव के संसय व भ्रम नष्ट हो जाते हैं ।
आत्मीय जन ! बिना श्री राम प्रेम के जीवन जीते हुए हम आप भी संशय व भ्रम से भरे रहते हैं, इन्हें अपने जीवन से समाप्त करना चाहते हैं तो श्री राम जी की भक्ती में लगें, श्री राम जी को एवं उनकी करुणा कृपा प्राप्ति के उपाय करें, इसके लिये सर्वोत्तम साधन श्री सीताराम जी के युगल चरणों में मन चित बुद्धि को लगाकर निरन्तर श्री सीताराम नाम का भजन करें…..अस्तु ! श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम जय रघुनंदन जय सियाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

