श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

28 फरवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

बिनु संतोष कि काम नसाहीं ।
काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं ।।राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा
थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा ।।( उत्तरकांड 89/1)
राम राम 🙏🙏
काकभुसुंडि जी अपने पूर्व जन्म की कथा सुनाते हुए कहते हैं कि राम जी ने मेरा मोह दूर कर अपनी भक्ति प्रदान की तब मैं कुछ दिन तक अयोध्या रहकर अपने आश्रम लौट आया । जब से राम जी ने मुझे अपना लिया तबसे माया ने मुझे परेशान नहीं किया ।मेरा अपना अनुभव है गरुड़ जी कि भगवान के भजन बिना जीवन के क्लेश दूर नहीं होते हैं ।संतोष के बिना कामनाओं का नाश नहीं होता है और कामनाओं के रहते स्वप्न में भी सुख नहीं मिलता है ।राम जी के भजन बिना कामनाएँ जाती नहीं हैं , कही बिना धरती के पेड़ उग सकते हैं ।
हमारे दुख का कारण हमारी कामनाएँ हैं । संतोष कामनाओं को कम करता है परंतु कामनाओं की समाप्ति राम भजन से ही हो सकती है । मानव तन में कामनाओं का अपने आप समन होना संभव नहीं है , राम भजन से जीवन की जितनी भी दुरुह कठिनाइयाँ हैं कामनाओं सहित सबसे पार पाया जा सकता है । अतएव और कुछ नहीं , बस ! राम भज , राम भज , राम राम भज 🚩🚩🚩

संकलन तरूण जी लखनऊ

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