बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हुआ एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
ब्यूरो चीफ आर एल पांडेय
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 2 अगस्त को पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से “वर्तमान समय में शोध प्रकाशन- लाइफ साइंस प्रोग्राम” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर पर्यावरण विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शिखा, आयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, स्प्रिंगर नेचर के संपादकीय निदेशक डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, स्प्रिंगर नेचर की एसोसिएट एडिटर डॉ. सांची भीमराजका एवं श्रीमती नूपुर वर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति की ओर से शिक्षकों एवं अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट करने के साथ हुई। इसके पश्चात प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा द्वारा ने सभी को अतिथियों के परिचय एवं कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया। मंच संचालन का कार्य डॉ. सूफिया अहमद ने किया।
डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि एक शोधकर्ता के लिए अपने निष्कर्षों को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने पत्रिकाओं में प्रकाशित करना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह उनके शोध कार्यों एवं अकादमिक भविष्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
आयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ युवा शोधकर्ताओं, विशेष रूप से पीएचडी शोधार्थियों को उच्च स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशन पर नवीनतम अपडेट एवं शीर्ष प्रकाशकों के लिए शोध पत्र या पुस्तक लिखने के बारे में जानने में मदद करती हैं।
स्प्रिंगर नेचर के संपादकीय निदेशक प्रो. नरेंद्र अग्रवाल चर्चा के दौरान कहा कि स्प्रिंगर नेचर दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है और पुस्तक प्रकाशन बाजार का लगभग 80% स्प्रिंगर नेचर का है। उन्होंने एक अच्छी पुस्तक प्रस्ताव लिखने के विभिन्न चरणों के बारे में विस्तार से बताया , जिसे प्रमुख प्रकाशकों द्वारा स्वीकार किया जा सके।
पर्यावरण विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शिखा ने साहित्यिक चोरी एवं कॉपीराइट उल्लंघन के विषय में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही डॉ. सांची भीमराजका एवं श्रीमती नूपुर वर्मा दोनों ने ही हाल ही के दिनों में हुए शोध प्रकाशनों पर प्रस्तुतियाँ दीं एवं शोध पत्र और किताबें लिखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका के बारे में बताया। कार्यशाला के अंत में एक इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया जिसमें शोध पत्रों और पुस्तकों के प्रकाशन के संबंध में पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दिये गये। अंत में धन्यवाद ज्ञापन का कार्य प्रो. शिखा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

