ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
सूरतगंज बाराबंकी. प्रभु ने मानव शरीर सांसारिक कार्य करने और मन माधव का स्मरण करने के लिए दिया है. इसलिए सच्चे साधक को संसार में रहते हुए कभी गोविन्द को नहीं भूलना चाहिए. यह बात चन्दूरा गांव में चल रही श्रीमदभागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालु जनों को कथा सुनाते हुए कही. यजमान गिरीश चंद्र दीक्षित व श्रीमती रमा दीक्षित समेत सैकड़ों भक्तजनों की मौजूदगी में कथा व्यास विमल बल्लभ ने कहा कि गुरु में माता – पिता और भगवान तीनों के गुण होते हैं. वह भक्त को सन्मार्ग पर चलाकर भगवान से साक्षात् करा देता है.कथा व्यास श्री बल्लभ ने कहा कि ईश्वर अंश और जीव अविनाशी है. आत्मा अजर – अमर है. वह कभी मरती नहीं है. एक शरीर छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाती है. कथा में सर्वश्री सुरेश चंद्र दीक्षित, आशुतोष, बृजेश, आशीष व अभिनव दीक्षित आदि मौजूद रहे.कथा व्यास श्री बल्लभ ने कहा कि सच्चा भक्त वही है जो गुरु में ईश्वर के दर्शन करता है. उसके मन में गुरु के प्रति सदैव श्रद्धा भाव रहता हो. गुरु ज्ञान प्राप्त करने की उत्कृष्ट इच्छा हो. उन्होंने कहा कि मानव जीवन में गुरु का विशेष महत्व है. बिना गुरु कृपा के जीवन अधूरा है. माधव को पाना है तो मन को निर्मल करना ही होगा. हर प्राणी में भगवत दर्शन करना चाहिए.कथा से पूर्व सुबह आचार्य अथर्व मिश्र व आचार्य सुधाकर अवस्थी ने यजमान जोड़ी से विधिवत पूजा पाठ कराया. अपरान्ह व सायंकालीन कथा में श्याम सुंदर पाण्डेय, अनिरुद्ध जोशी व बांके बिहारी जोशी ने संगीत के जरिये कथा व्यास का साथ दिया. भगवत भक्त नरेश दीक्षित, शिव कुमार त्रिवेदी, नीलम दीक्षित, एस. डी. दीक्षित, प्रेम मिश्र, संजय मिश्र, आदित्य मिश्र, राजेश दीक्षित, वंदना, दिनेश चंद्र दीक्षित, आशीष, शिल्पी, शीलू, सुरभि, आस्था, शोभा त्रिवेदी, जूली, कलश व गुनगुन आदि को कथा का आनंद मिला.

