20 मार्च: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू ।
दुइ कै चारि मागि मकु लेहू ।।
रघुकुल रीति सदा चलि आई।
प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई।।
( अयोध्याकाण्ड 27/2)
जय श्रीराम 🙏🙏
मंथरा की सिखाई कैकेई दशरथ जी से कहती है कि आपने दो वरदान देने को कहा था लेकिन अब उनके मिलने में संदेह हो रहा है। महाराज दशरथ जी कहते हैं कि मुझे झूठे दोष न दो , दो के बदले चाहे चार माँग लो । रघुकुल की सदा से यह रीति है कि प्राण भले ही चले जायँ पर वचन नहीं जाता है ।
आत्मीय जन ! जो अपने वचनों का निर्वाह करते हैं उन्हीं के पास श्री राम आते हैं। अपने वचनों का वही परिवार निर्वाह कर सकता है जो सत्य से जुड़ा होता है । श्री राम जी परम सत्य हैं । अतः सत्य को अपनाइए सत्य पर चलिए और सत्य बोलिए, सत्य के साथ रहिए, असत्य का संग कभी न करिए न ही असत्य का समर्थन करिए, अवश्य ही श्रीराम कृपा मिलेगी इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है। अथ ! श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

