31 अक्टूबर पर विशेष: –
राष्ट्रीय एकता के प्रतीक – सरदार वल्लभभाई पटेल: अम्बरीष कुमार सक्सेना
हरदोई।शिव सत्संग मण्डल के राष्ट्रीय समन्वयक अम्बरीष कुमार सक्सेना के अनुसार सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं जिन्हें “लौह पुरुष” और “राष्ट्रीय एकता के शिल्पकार” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज़ाद भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान दिया।
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता झवेरभाई पटेल एक साधारण किसान थे और माता लाडबाई धार्मिक विचारों वाली थीं। बचपन से ही सरदार पटेल में अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय की भावना थी।
उन्होंने वकालत की पढ़ाई इंग्लैंड से की और भारत लौटकर एक सफल वकील बने। परंतु देशभक्ति की भावना ने उन्हें गांधीजी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ दिया।
स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान:
सरदार पटेल ने किसानों के अधिकारों के लिए खेड़ा सत्याग्रह और बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया। बारदोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें “सरदार” की उपाधि दी गई। वे कांग्रेस के प्रमुख नेता बने और स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में लगभग 562 रियासतें थीं। सरदार पटेल ने अपनी कुशल नीति, दृढ़ता और कूटनीति से इन रियासतों का भारत संघ में विलय कराया। यह कार्य असंभव प्रतीत हो रहा था, परंतु उनके साहस और दूरदर्शिता ने इसे संभव बना दिया। इसी कारण उन्हें “भारत का बिस्मार्क” कहा जाता है।
सरदार पटेल का पूरा जीवन अनुशासन, दृढ़ संकल्प और देश की एकता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने देशहित को हमेशा सर्वोपरि माना।
उनकी स्मृति में गुजरात के केवड़िया में विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” स्थापित की गई है, जो भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक है।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन हमें यह सिखाता है कि एकता में ही शक्ति है। वे सच्चे अर्थों में भारत की एकता, अखंडता और समरसता के प्रतीक हैं। उनका जीवन और विचार सदैव हमें प्रेरित करते रहेंगे।

