श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

31 मई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

साधक सिद्ध बिमुक्त उदासी ।
कबि कोबिद कृतग्य संन्यासी ।।
जोगी सूर सुतापस ग्यानी ।
धर्म निरत पंडित बिग्यानी।
तरहिं न बिनु सेए मम स्वामी ।
राम नमामि नमामि नमामी ।।
( उत्तरकांड 123/3-4)
राम राम 🙏🙏
गरूड़ महराज को राम कथा सुनाने के बाद काकभुसुंडि जी परम प्रसन्न हैं । वे अपने पर राम कृपा को याद कर कहते हैं कि राम जी के समान मैं किसे मानूँ । साधक , सिद्ध , जीवन मुक्त, विरक्त, कवि , विद्वान, योगी , तपस्वी , ज्ञानी विज्ञानी आदि ये सब बिना मेरे स्वामी राम जी का भजन किए तर नहीं सकते हैं ।
जब साधक , सिद्ध, महात्मा , तपस्वी , ज्ञानी , विज्ञानी बिना राम भजन के तर नहीं सकते हैं तो हमारी आपकी क्या गिनती है । अस्तु ! सदगति चाहते हैं तो भजें, राम भजें, सियाराम भजें 🚩🚩🚩

संकलन तरूण जी लखनऊ

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