4 जुलाई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
प्रिया सोचु परिहरहु सबु
सुमिरहु श्रीभगवान ।
पारबतिहि निरमयउ जेहिं
सोइ करिहि कल्यान ।।
( बालकांड, दो. 71)
राम राम 🙏🙏
सती जी का पुनर्जन्म पर्वतराज हिमाचल के घर हुआ है । नारद जी आते हैं , हिमाचल जी बेटी के गुण व दोष के बारे में पूछते हैं । नारद जी बताते हैं जिसे सुनकर हिमाचल व मैना सोच में पड़ जाते हैं । मैना जी कहती हैं कि पार्वती का विवाह ऐसा करिएगा जिससे बाद में पुत्री को कोई कष्ट न हो ।हिमाचल जी कहते हैं कि हे प्रिया ! चिंता छोड़कर भगवान का स्मरण करो , जिसने पार्वती को बनाया है वे ही उसका कल्याण करेंगे ।
यह जगत जगदीश का है , वे ही इसे बनाने, पालने व बिगाड़ने वाले हैं । हम सब उनकी कृति हैं । हमारा काम तो चिंता छोड़ बस उनका स्मरण करना होना चाहिए जो हम करते नहीं हैं इसीलिए चिंतित रहते हैं । जो सतत प्रभु स्मरण में रहते हैं उनके कार्य भगवान खुद करते हैं । अत: हर परिस्थिति में राम सुमिरन करें , राम सुमिरन में रहें । अथ ! जय जय राम सुमिरि , जय राम सुमिरि 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

