श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
मंगल करनि कलिमलहरनि
तुलसी कथा रघुनाथ की ।
गति कूर क़बिता सरित की ज्यों
सरित पावन पाथ की ।।
( बालकांड, दो. 9 छंद )
राम राम 🙏🙏
मानस जी के आरंभ में अपनी रचना के बारे में बताते हुए गोस्वामी जी कहते हैं कि राम जी कथा मंगल करने वाली तथा कलियुग के पापों हरने वाली है । मेरी इस कविता रूपी नदी की चाल पवित्र गंगा नदी की चाल टेही है ।
राम जी की कथा मंगल करने वाली व कलियुग के पापों को हरने वाली है । हम आप कलियुग के पापों के बीच फँसे पड़े हैं जिससे राम कथा ही हमें छुटकारा दिला सकती है ।राम जी की कथा का कार्य ही मंगल करना है । जो सुनें तब जानें, जो अपना लें उसका कल्याण हो जाए। अथ ! जय जय राम कथा ,
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भरद्वाज सुनु जाहि जब
होइ बिधाता बाम ।
धूरि मेरुसम जनक जम
ताहि ब्यालसम दाम ।।
( बालकांड, दो. 175)
राम राम 🙏🙏
प्रतापभानु परिवार के पूरी तरह से नष्ट होने की कथा सुनाकर याज्ञवल्क्य जी भरद्वाज जी से कहते हैं कि भरतद्वाज जी सुनिए ! जब विधाता किसी के विपरीत हो जाता है तब उसके लिए धूल सुमेरु पर्वत के समान, पिता काल समान और रस्सी सर्प के समान डँसने वाली हो जाती है,
हमारा सबका हित भगवान के अनुकूल रहने में ही निहित है । भगवान की अनुकूलता तो सत्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता व सत्य आचरण से ही पाई जा सकती है । राम जी परम सत्य हैं । अतएव राम जी के अनुकूल आचरण करें । अथ ! श्रीराम जय राम जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

