17 मई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
नाथ कोसलाधीस कुमारा ।
आए मिलन जगत आधारा ।।
राम अनुज समेत बैदेही ।
निसि दिनु देव जपत हहु जेही ।।
( अरण्यकांड 11/4)
जय सियाराम 🙏🙏
चित्रकूट से आगे चलते हुए श्री राम जी सरभंग, सुतीक्ष्ण मुनि से भेंट करते हैं । पुनः वे अगस्त्य मुनि के आश्रम पहुंचते हैं । अगस्त्य जी के शिष्य सुतीक्ष्ण उन्हें श्री राम जी के आने की सूचना देते हुए कहते हैं कि हे नाथ! श्री दशरथ पुत्र जगदाधार श्री राम जी छोटे भाई लक्ष्मण व मां जानकी के साथ आपसे मिलने आए हैं, जिनका आप रात दिन जप करते रहते हैं ।
श्री सीताराम प्रेमियों,हम आप कहते रहते हैं कि श्री राम जी हम पर कृपा नहीं कर रहें हैं जबकि हम सभी सांसारिक क्रिया कर्म में श्री राम जी को भूले ही रहते है, न भजन के लिए समय है, न ही श्री राम जी को अपने मन, चित्त और हृदय में स्थान दे पाते हैं तो कैसे कृपा प्राप्ति होगी। साधु सन्त, ऋषि मुनि अपने हृदय सिंहासन पर विराजमान करके रात दिन नाम जप करते रहते हैं, तब वे सदैव श्री सीताराम जी को अपने समीप महसूस करते हैं तथा उनके ऊपर प्रभु की कृपा भी बनी रहती है अतः हम सब भी अधिक से अधिक नाम जप बढ़ाएँ , अवश्य हम सब भी श्री सीताराम जी की कृपा प्राप्त करेंगे। अतएव सतत भजन करें….श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

