24 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
पापवंत कर सहज सुभाऊ ।
भजनु मोर तेहि भाव न काऊ ।।
जौं पै दुष्ट ह्रदय सोइ होई।
मोरें सनमुख आव कि सोई ।।
( सुंदरकांड 43/2)
राम राम 🙏🙏
विभीषण राम जी की शरण में आए हैं । सुग्रीव बताते हैं , पूछने पर कहते हैं कि भेद लेने आया है ।राम जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में आ जाता है उसे मैं त्यागता नहीं हूँ । मेरे में लगने पर ही जीव के पाप नष्ट होते हैं । जो पाप कर्म में लगा होता है उसे मेरा भजन नहीं भाता है ।विभीषण यदि ख़राब ह्रदय का होता तो क्या मेरे पास आता ?
ख़राब/ बुरा ह्रदय वाला वही है जिसे सत्य नही भाता है , जिसे राम पसंद नहीं है , राम गुणगान पसंद नहीं है । विभीषण को ये सब पसंद है , इसीलिए राम सनमुख हुए ।हमें आपको क्या भाता है , विचार करें व राम सनमुख हो । अस्तु! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

