11 अगस्त – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
रस रस सूख सरित सर पानी ।
ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी
जानि सरद रितु खंजन आए ।
पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।
( किष्किंधाकांड 15/3)
राम राम 🙏🙏
बालि का बध कर तथा सुग्रीव को राजा बनाकर श्री राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षन पर्वत पर निवास कर रहें हैं। श्री लक्ष्मण जी को वे ऋतु वर्णन करते हुए कहते हैं कि वर्षा बीत जाने पर नदियों, तालाबों का जल धीरे धीरे सूख रहा है जैसे ज्ञानी ब्यक्ति ममता का त्याग करते हैं । शरद ऋतु आ गई है ऐसा जानकर खंजन पक्षी दिखाइ दे रहे हैं जैसे समय आने पर पुण्य प्रकट हो जाते हैं ।
श्री सीताराम प्रेमी जन, अपने पुण्य हम तभी प्रकट मानें जब हमारा मन श्री सीताराम जी के युगल चरणों में समर्पित हो जाय तथा श्री राम जी के रूप लीला और गुणों का चिन्तन करने लगे, श्री राम कथा श्रवण करने लगे तभी अपना समय अनुकूल मानें । अतः श्री राम जी की भक्ति और गुणगान कर अपने पुण्य बढ़ाएं….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

