श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

3 सितम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

सुनु सुत भयउ कालबस रावन ।
सो कि मान अब परम सिखावन
धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन ।
भयहु तात निसिचर कुल भूषन ।
( लंकाकांड 63/4)
जय सियाराम 🙏🙏
संजीवनी जड़ी से श्री लक्ष्मण जी का उपचार हुआ है, उधर रावण जा कर कुंभकर्ण को जगाता है , उसे सब कुछ बताता है। कुंभकर्ण लड़ने आता है , युद्ध भूमि में विभीषण उससे मिलते हैं , उसे सब बताते हैं , वह कहता है कि हे पुत्र! रावण काल के वश में हो गया है , इसलिए जो उचित है उसे भी वह नहीं मान रहा है। हे विभीषण ! तुम धन्य हो, धन्य हो,तुम राक्षस वंश के भूषण हो ।
आत्मीय जन ! जो काल के वश में होता है वह किसी की नहीं सुनता है परंतु जो श्री राम के वश में होता है उसे सत्य भाता है , वह सत्य अपनाता है , अपना व अपने कुल का मान बढ़ाता है । अतः काल नहीं श्री राम जी के वश हो जाइए , अपना व अपनों का मान बढ़ाइए । अथ……श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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