22 नवंबर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सुनु सुरेस उपदेसु हमारा ।
रामहि सेवकु परम पियारा ।।
मानत सुखु सेवक सेवकाईं ।
सेवक बैर बैरु अधिकाईं ।।
( अयोध्याकाण्ड 218/1)
राम राम जी 🙏🙏
भैया भरत जी श्री राम जी से मिलने चित्रकूट जा रहे हैं । भैया भरत के समय रास्ता श्री राम जी के वन जाते समय से अधिक सुगम व सुखद है । यह देखकर इंद्र डर जाते हैं कि कहीं श्री राम जी वापस न अयोध्या चल दें । उन्हें समझाते हुए देवगुरु बृहस्पति कहते हैं कि हे देवराज! हमारी बात सुनो, श्री राम जी को अपना सेवक परम प्रिय है । वे अपने सेवक की सेवा से सुख मानते हैं और सेवक के साथ वैर करने पर बड़ा वैर मानते हैं ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी को अपना सेवक परम प्रिय हैं , अपने सेवक की लड़ाई वे स्वयं लड़ते हैं । अतः श्री राम सेवा कर श्री राम जी के परम प्रिय बन जाएँ व श्री राम जी द्वारा रक्षित हो जाएँ। अथ……श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

