सीता शांति यात्रा, सीता भू प्रवेश धाम सीताद्वार भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की:स्वामी भगवदाचार्य

सीता शांति यात्रा, सीता भू प्रवेश धाम सीताद्वार भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की:स्वामी भगवदाचार्य

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ। सीता शांति यात्रा, सीता भू प्रवेश धाम सीताद्वार भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से हाल में श्री सीता भू प्रवेश धाम ट्रस्ट एवं सनातन धर्म परिषद के तत्वावधान में सीता शांति यात्रा का आयोजन किया गया। नेपाल में स्थित महारानी सीता के जन्मस्थान जनकपुरधाम सीतामढ़ी से चलकर भगवान राम के जन्मस्थान अयोध्याधाम होते हुए श्रावस्ती जनपद के सीता भू प्रवेश धाम सीता द्वार तक की गयी। यह यात्रा 24 मार्च 2024 जनकपुर सीतामढ़ी से चलकर मुजफ्फरपुर पटना बक्सर काशी प्रयागराज अयोध्याधाम एवं श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि राजापुर सूकरखेत गोंडा होते हुए उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद के सीता भू प्रवेश धाम सीता द्वार में समापन किया गया। इस यात्रा का उद्देश्य भगवती सीता जी के बारे में श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण जानकारी देने का लक्ष्य था। जनक नरेंद्र नन्दिनी जनकजा जानकी सीता जी का अवतरण बिहार के सीतामढ़ी नेपाल के जनकपुरधाम में लालन पालन एवं अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के ज्येष्ठ पुत्र भगवान श्री राम के साथ विवाह अयोध्या में कुछ काल व्यतीत होने पर अयोध्या से 14 वर्ष का बनवास लंका विजय के पश्चात् अयोध्या प्रत्यावर्तन और राज्याभिषेक के कुछ वर्षों बाद भगवती सीता का परित्याग हुआ । वाल्मीकि आश्रम बिठूर में लव कुश का जन्म तथा अयोध्या के अंतर्गत श्रावस्ती जनपद के सीता भू प्रवेश धाम सीता द्वार में भगवती सीता पृथ्वी में प्रवेश कर गई। माता सीता के सम्मान में अयोध्या में बालिकाओं की शिक्षा के लिए भगवती सीता के नाम पर एक विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए और सीता भू प्रवेश धाम सीता द्वार को रामायण सर्किट में सम्मिलित करके इसका विकास किया जाना चाहिए। सीता शांति यात्रा में भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। डॉ. स्वामी भगवदाचार्य अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने उक्त जानकारी दी।

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