हिंदुस्तानी पोएट्री फेस्टिवल का हुआ समापन, युवा कवियों ने लिया बढ़ चढ़ कर हिस्सा

महाराष्ट्र ब्यूरो विपिन गुप्ता:

मुंबई, 21 मार्च |  विश्व कविता दिवस के अवसर पर शोधावरी, वाग्धारा, ध्रुवाईका और हिन्दुस्तानियत के संयुक्त प्रयास से मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदुस्तानी कविता महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमे कविता प्रेमियों, युवा रचनाकारों व लेखकों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

इस एक दिवसीय साहित्यिक कार्यक्रम को मुंबई विश्वविद्यालय, कलिना के कविवर्य कुसुमग्राज मराठी भाषा भवन में आयोजित किया गया । उपस्थित लोगों को कविता वाचन, चर्चा और प्रस्तुतियों से भरपूर एक अविस्मरणीय दिन का अनुभव मिला।

इस आयोजन में हिंदी फिल्म जगत को कई हिट गीत देने वाले गीतकार शेखर अस्तित्व, सीनियर शायर ओबैद आज़म आज़मी, डॉ. भाग्यश्री वर्मा, वाग्धारा अध्यक्ष और मनसे के महासचिव व प्रवक्ता डॉक्टर वागीश सारस्वत, वरिष्ठ लेखिका व कवियत्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा और हिंदुस्तानियत के संस्थापक व डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी बजमोर मीडिया प्रा. लिमिटेड के डायरेक्टर जीतेश वैश्य, व्यवसायी कमलेश वासवानी, प्रसिद्ध समाजसेविका कविता गुप्ता, सृष्टि के संस्थापक बिपिन गुप्ता, व्यवसायी गोपीकृष्ण बूबना, शशिदेव सिरोठिया, पुष्पा चौधरी, प्रमोद यादव, एडवोकेट सुनील सावंत इत्यादि उपस्थित रहे।

इस इवेंट का मुख्य आकर्षण पोएट्री ओपन माइक प्रतियोगिता थी, जहां युवा कवियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। प्रसिद्ध बॉलीवुड गीतकार व कवि शेखर अस्तित्व, और प्रसिद्ध शायर व प्रोफ़ेसर ओबैद आज़म आज़मी व डॉ. प्रज्ञा शर्मा ने निर्णायक की भूमिका में युवा रचनाकारों की कविताओं को परखा। प्रतिभागियों की कविताओं की गुणवत्ता और उनके उत्साह ने निर्णायकों को काफी प्रभावित किया।

डॉ प्रज्ञा शर्मा ने बताया कि युवाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम मे चार चाँद लगा दिए। उनमें एक नया दृष्टिकोण देखने को मिला। मुझे उनकी प्रतिभा और रचनात्मकता ने बहुत प्रभावित किया ।

प्रतिभागियों का कविता के प्रति उत्साह और समर्पण देखते हुए गीतकार शेखर अस्तित्व ने कहा कि यह निश्चित रूप से साहित्य के लिए एक शुभ संकेत है ।

श्री ओबैद आज़म आज़मी ने उपस्थित प्रतिभागियों को शुभकामनाओं के साथ ही लेखन से संबंधित मार्गदर्शन किया।

कविता प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर भीमसेन सिंह उज्वल, द्वितीय स्थान पर तौसीफ कातिब और तृतीय स्थान पर कबीर रहे । इसके अलावा नेहिका सिंह राजपूत और साक्षी चंद्रशेखर शर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

वागीश सारस्वत जी ने सभी प्रतिभागियों को कविता के गुण सिखाते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

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