कविता

फांसी पर लटक रहे थे जब,
आंखों में आसूं न आया था,
हंसते-हंसते बलिदान हुए,
जन गण मन फिर गाया था।

उन वीरों को याद करो,
जिसने आजादी लाई थी,
भारत देश के लिए उन्होंने,
सीने में गोली खाई थी।

आएगी देश में आजादी,
भगत सिंह ने यह हौसला बतलाया था,
उस बेदर्द फिरंगी ने,
फांसी पर तब लटकाया था।

कुर्बानी वाले उस दिन को,
जब भी याद करोगे तुम,
रो पड़ेगी आंखें तेरी,
उस दिन की बात करोगे तुम।

आजादी के उस मंजर पर,
खून की खूब नदियां बही,
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा,
का नारा लगा था वहीं।

‌‌‍‌ गांधी ने जोश जगाया,
अंबेडकर ने नारा लगाया,
तुमको क्या लगता है भाई,
भारत में आजादी कौन लाया।

फांसी पर लटक रहे थे जब,
आंखों में आसूं न आया था,
हंसते-हंसते बलिदान हुए,
जन गण मन फिर गाया था।

दिव्या शुक्ला
कक्षा 6,जनपद गोंडा

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