10 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
देत लेत मन संक न धरई ।
बल अनुमान सदा हित करई ।।
बिपति काल कर सतगुन नेहा।
श्रुति कह संत मित्र गुन एहा ।।
( किष्किंधाकांड 6/3)
राम राम 🙏🙏
हनुमान जी ने सुग्रीव की मित्रता राम जी से करा दी है । राम जी ने सुग्रीव से नगर के बाहर वास करने का कारण पूछा है, सुग्रीव ने सब बताया है । राम जी ने कहा कि बालि को एक ही बाण से मैं मार डालूँगा ।मित्र का गुण है कि वह मन में संदेह रख कर लेन देन न करे तथा अपनी क्षमतानुसार सदा मित्र का हित करे , कठिनाई में तो सौगुना मित्र से स्नेह करें , श्रेष्ठ मित्र के यह लक्षण हैं ऐसा वेद कहते हैं ।
राम जी सर्वश्रेष्ठ मित्र हैं । हम आप तो इनसे भी केवल लेने का व्यवहार रखते हैं , देने में खुलकर व्यवहार नहीं करते हैं , इसीलिए हमारी यह गति है । पूरे समर्पण के साथ बिना संसय के राम जी से मित्रता करें , परिणाम प्रसन्नतापरक होगा । अथ ! जय जय राम, जय जय राम
संकलन कर्ता तरुण जी लखनऊ

