श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

11 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

निज पद नयन दिएँ मन
राम पद कमल लीन ।
परम दुखी भा पवनसुत
देखि जानकी दीन ।।
( सुंदरकाड, दो. 8 )
राम राम 🙏🙏
लंका में हनुमान व विभीषण की आपसी वातचीत उपरांत श्री हनुमान जी विभीषण से माँ से मिलने के लिए कहते हैं । विभीषण ने उपाय बताया है । श्री हनुमान जी पुनः छोटा सा रूप धारण कर अशोक वाटिका जाते हैं जहाँ पर श्री सीता जी विराजती हैं । उन्होंने अपने नेत्रों को अपने चरणों में तथा मन को राम चरणों में लगा रखा है जिसे देखकर हनुमान जी बहुत दुखी हो गये ।
श्री सीता जी अपने चरणों को देखती हुई मानो हमसे कह रही हैं कि विपत्ति में हमेशा आत्मनिरीक्षण करते रहो और मन को राम चरणों में लगा कर रखें , तब भगवान की सहायता के रूप में हनुमान उपस्थित हो जाएँगे । अस्तु! सीताराम हनुमान सीताराम हनुमान 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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