27 मई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
उमा जे राम चरन रत,
बिगत काम मद क्रोध ।
निज प्रभुमय देखहिं जगत,
केहि सन करहिं बिरोध ।।
( उत्तरकांड, दो. 112)
जय सियाराम🙏
लोमश मुनि ने काकभुसुंडि को कौआ होने का श्राप दिया है तथापि काकभुसुंडि मुनि को प्रणाम कर वहाँ से चल पड़े हैं । श्री शिव जी भगवती पार्वती से कहते हैं कि जो श्री राम चरणों के प्रेमी हैं और काम क्रोध अभिमान से रहित हैं , वे संपूर्ण जगत को अपने प्रभु से भरा हुआ देखते हैं, फिर वे किससे वैर करें ।
श्री सीताराम प्रेमियों,आप श्री राम प्रेमी तभी हैं जब आप सबमें श्री राम जी को देखने लगते हैं, आपको सब कुछ राममय दिखाई देने लगता है, फिर आपका किसी से वैर नहीं रह जाता है । अतः विरोध मुक्त और आनन्दमय जीवन हेतु अपना राम प्रेम बढ़ाएँ तथा निरन्तर श्री सीताराम नाम का जप करते रहें….. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, पतित पावन सीताराम। जानकीवल्लभ राजाराम, सीताराम जय सीताराम। राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

