श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

7 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना
तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना ।।
समदरसी मोहि कह सब कोऊ।
सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ।।
( किष्किंधाकांड 3/4 )
जय सियाराम 🙏🙏
सुग्रीव जी के कहने पर श्री हनुमान जी विप्र रुप धारण कर श्री राम जी के पास आते हैं, प्रश्न करते हैं, कुछ पल बाद वे अपने प्रभु को पहचान लेते हैं, तब श्री राम चरणों में गिर पड़ते हैं। श्री राम जी उन्हें उठाकर कहते हैं कि आप मन में ग्लानि मत करो, आप लक्ष्मण से भी दूने मुझे प्रिय हो, सब मुझे समदर्शी कहते हैं परंतु सेवक मुझे अत्यंत प्रिय होता हैं क्योंकि उसकी मेरे प्रति अनन्य गति एवं अनन्य भक्ति होती है ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी से अपने लिए दूना प्रेम चाहते हैं तो श्री राम सेवक बनें, श्री राम जी से अनन्य प्रेम करें , राम जी के अनन्य बनें , अनन्य रहें । इसके लिए केवल एक ही साधन है श्री सीताराम नाम का निरन्तर भजन, अस्तु …….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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