8 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
धर्म हेतु अवतरेहु गोसाईं ।
मारेहु मोहि ब्याध की नाईं ।।
मैं बैरी सुग्रीव पियारा ।
अवगुन कवन नाथ मोहि मारा ।।
( किष्किंधाकांड 8/3)
राम राम🙏🙏
बालि से युद्ध में जब सुग्रीव ने हार मान ली है तब श्री राम जी ने बालि को बाण मारा है । प्रभु को पहचान कर उसने अपना जीवन सफल माना है । वह श्री राम जी से पूछता है कि हे प्रभु! धर्म रक्षा के लिए आपने अवतार लिया है और मुझे ब्याध की तरह छिपकर क्यों मारा । मैं वैरी और सुग्रीव प्यारा क्यों प्रभु, हे नाथ किस अवगुण के कारण आपने मुझे मारा है ।
आत्मीय जन ! सब को अपना धर्म कर्म याद रहता है परंतु जो अभिमानी होता है उसे अपना कर्तव्य धर्म याद नहीं रहता है, वह अभिमान वश सदैव दूसरे के धर्म को पूछता रहता है। अभिमान तो तब जाएगा जब जीव श्री राम जी की भक्ति में लगता हैं। श्री राम जी की भक्ति में लगते ही हमारे सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं क्योंकि हमें धर्म का बोध हो जाता है। अतः श्री राम जी की भक्ति में लगकर अपना धर्म, अपना कर्म जान लें। अस्तु….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम जय रघुनंदन जय सियाराम, सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

