लाइफ केयर फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने उरुवा ब्लॉक के प्रधानों से मिलकर जाना बालिका शिक्षा व्यवस्था का हाल

लाइफ केयर फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने उरुवा ब्लॉक के प्रधानों से मिलकर जाना बालिका शिक्षा व्यवस्था का हाल–
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रिंटू शाही से बालिका शिक्षा व्यवस्था पर जोर देने पर हुई खुलकर चर्चा–

उरुवा ब्लॉक में बालिका शिक्षा पर जागरूकता बढ़ाने के लिए लाइफ केयर फाउंडेशन की पहल
ग्राम प्रधानों के साथ बैठक में शिक्षा व्यवस्था सुधार को लेकर हुई गहन चर्चा

उरुवा (गोरखपुर): ब्यूरो चीफ आशुतोष चौधरी
लाइफ केयर फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को उरुवा ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न ग्राम प्रधानों से मुलाकात कर बालिका शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानी। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने ग्राम प्रधानों से बातचीत कर शिक्षा के स्तर, विद्यालयों की स्थिति और अभिभावकों की सोच को लेकर विस्तार से चर्चा की।

इस विशेष बैठक में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रिंटू शाही ने फाउंडेशन के सदस्यों से खुलकर बातचीत की और कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी कई परिवार ऐसे हैं जो अपनी बेटियों की पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाज में जागरूकता फैलाना सबसे पहली जरूरत है, ताकि हर बालिका को शिक्षा का समान अधिकार मिल सके।

रिंटू शाही ने बताया कि पंचायत स्तर पर भी इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं — स्कूल जाने वाली लड़कियों की उपस्थिति बढ़ाने, छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी देने और जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पंचायत और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

लाइफ केयर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ स्थिति का आकलन करना नहीं, बल्कि शिक्षा में सुधार के लिए जनभागीदारी बढ़ाना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे स्थानीय प्रशासन और शिक्षकों के साथ मिलकर एक “बालिका शिक्षा जागरूकता अभियान” चलाएंगे, जिसमें गांव-गांव जाकर माता-पिता को बेटियों की पढ़ाई का महत्व समझाया जाएगा।

बैठक के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि कई जगहों पर विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएँ सामने आई हैं। फाउंडेशन ने इन मुद्दों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और समाधान के लिए पहल करने की बात कही।

कार्यक्रम के अंत में सभी ग्राम प्रधानों और प्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गांवों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, ताकि कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे।

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