विभागीय अधिकरियों की मिली भगत से कोठारी प्रोडेक्स ति० द्वारा करीब रुपये पांच सौ करोड़ की राजस्व (GST) किया गया चोरी: जनहित में सरकार से कार्यवाही की अपील
संकलन विनोद कुमार सिंह लखनऊ
राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा परिषद एक सामाजिक संस्था है, संस्था सामाजिक मुद्दों को समय-समय पर उठाती रहती है संस्था का उद्देश्य संविधान एवं कानून की परिधि में पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना एवं राष्ट्र हित के मुद्दों को मुखरता से उठाना है। इसी क्रम में दिनांक ११-०९-२०२५ सन्दर्शित पत्र श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा संस्था को स्पीड पोस्ट द्वारा प्राप्त हुआ है। संस्था के विधि विशेषज्ञों ने गहनता से संतग्न समस्त प्रपत्रों का अध्ययन किया एवं यह निष्कर्ष निकाला कि संलग्न प्रपत्र साफ़ लौर पर इस तरफ इशारा कर रहे है कि लोक सेवकौ (विभागीय अधिकारी) द्वारा वर्ष २००४ में १९.३७ करोड का जुर्माना (कर चोरी) कोठारी प्रोडेक्स सि० पर निकाला गया, जिसके साक्ष्य संलग्न है। उपरोक्त धनराशि की कर चोरी की गयी विभागीय अधिकरियों विशेषतयः तत्कालीन आयुक्त श्री यस. सी. जाना के दिशा निर्देशन एवं संलिप्तता के कारण आज तक राजस्व की वसूली नहीं की गई।
महोदय अत्यन्त तीव्रता एवं तत्परता के साथ विभाग ने छापेमारी कर राजस्व चोरी का मामला बनाया था। इसी क्रम में विभाग के अधिकरियों द्वारा कोठारी प्रोडेक्स लि० के कर्मचारी राजेश शर्मा के निवास पर छापा मार कर भारत वर्ष के अन्य कई राज्यों में स्थापित उत्पाद इकाइयों के राजस्व चोरी के पुख्ता एवं प्रमाणित दस्तावेज़ बरामद किये जिसके उपरान्त उत्पाद शुल्क (GST) की चौरी लगभग रु. ८० करोड है। बरामद दस्तावेज तत्कालीन आयुक्त श्री यस. सी. जाना के संरक्षण में सुरक्षित रखे थे। तत्कालीन अधीक्षक श्री शशि शेखर ने बरामद दस्तावेजों की सुरक्षित आयुक्त श्री यस. सी. जाना के कार्यालय में सौंप दिए । कोठारी प्रोडेक्स लि० में छापामारी टीम का नेतृत्व श्री शशि शेखर द्वारा किया जा रहा था ।
महोदय प्रेषक ने सूचना के अधिकार से यह सूचना प्राप्त की कि आयुक्त श्री यस. सी. जाना में बिना किसी शर्त एवं राजस्व वसूली के राजेश शर्मा के आवास से बरामद समस्त दस्तावेज कोठारी प्रोडेक्स लि० के मालिकों को वापस कर दिए, प्रश्न यह कि जिन दस्तावेजों के आधार पर कोठारी प्रोडेक्स नि० पर ८० करोड़ की अतिरिक्त चोरी श्री शशि शेखर द्वारा पकड़ी गयी थी जिसमे हवाला सेन-देन से लेकर वितरकों के नगद लेनदेन के दस्तावेज बरामद हुए थे। शशि शेखर जी द्वारा ताकालीन सहायक आयुक्त को अपनी रिपोर्ट प्रेषित की जिसकी प्रति संलग्न हैं। जो बरामद प्रपत्र राजस्व बसूनने में सहायक सिद्ध होते मालिकों को वापस कर दिए। उन दस्तावेजों को किस आधार पर तत्कालीन आयुक्त श्री यत. सी. जाना ने कोठारी प्रोडेक्स लि के
साथ ही राजस्व के रूप में संकलित करीब पांच करोड़ रुपये को निर्दोष सिद्ध करते हुए मालिकों को सरकारी खजाने से वापस कर दिया गया । महोदय यह बात एक दम साफ़ है कि श्री यस. सी. जाना ने निजी स्वार्थ के वशीभूत होकर विभाग एवं राष्ट्र के साथ बढ़ारी की है। आयुक्त श्री यत. सी. जाना के लिखित निर्देश पर बरासद समस्त मूल दस्तावेज कोठारी प्रोडेक्स लि० को वापस कर पूर्णतयः निर्दोष साबित कर दिया गया। विश्वस्त्र सूर्वी से जात हुआ है कि आयुक्त श्री यस. सी. जाना ने करीब करोड़ों की रिश्वत लेकर उपरोक्त राष्ट्रद्रोह का कृत्य किया | आयुक्त यस. सी. जाना ने स्वयं तो रिश्वत सी ही साथ ही अपने अधीनस्थ अधिकारयों को भी भरपूर रिश्वत दिलवायी संस्था तत्कालीन समस्त अधिकरियों की आय से अधिक सम्पति की जाँच की मांग करती है।
महोदय राष्ट्रहित में राजस्व वसूली के कार्य में निःस्वार्थ अपनी ऊर्जा एवं समय व्यतीत करने वाले श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव को महानिदेशक सतर्कता कार्यालय में तत्कालीन सहायक महानिदेशक श्री विकास कुमार ने समस्त दस्तावेजों के साथ कार्यालय बुलाया एवं शिकायत पत्र के साथ समस्त दस्तावेज प्राप्त कर कठोर कार्यवाही का आश्वासन दिया। निःसंदेह श्री विकास कुमार को भी राजस्व वसूली को नजरअंदाज कर निजी स्वार्थ साधना उचित लगा एवं एक मोदी रकम कोठारी बन्धुओं से प्राप्त कर किसी प्रकार की जाँच में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
महोदय वर्तमान में यदि समस्त कर चोरी की मय ब्याज के जोड़ा जाये तो यह लगभग रुपए पांच सौ करोड़ होती है आश्चर्य जनक है कि समस्त प्रमाणित दस्तावेजों के उपलब्ध होने के बावजूद विभाग का कोई भी अधिकारी राजस्ववसूली में दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहा है। जबकि अधिकारी गण वेतन ही इस काम का पाते है। एक सामान्य स्व व्यक्ति जिसका राजस्व वसूली से कोई सीधा सरोकार नहीं है न ही कोई निजी स्वार्य निहित है। यह मात्र इसलिए लड़ाई लड़ रहा है कि राष्ट्र को राजस्व प्राप्त हो जबकि यह दायित्व तो विभागीय अधिकारियों का है। यह इस बात को इंगित करता है कि आज भी रिश्वत का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है एवं कोई भी अधिकारी अपनी अतिरिक्त आमदनी बंद नहीं करना चाहता है।
महोदय उपरोक्त आरोपितों के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही एवं राजस्व कि वसूली सुनिश्चित
करे अन्यथा संस्था प्रेसवार्ता कर राष्ट्रव्यापी आन्दोलन करेगी एवं विभाग के मुख्यालय पर अपने
कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन कर विभागीय मिलीभगत एवं रिश्थल चोरी की उजागर करेगी जिसने विभाग
कि छति कि छति होना तय है।
प्रति प्रेषित
मा० प्रधानमंत्री आरत गणतंत्र मा वितमंत्री -भारत सरकार प्रवन्ध निदेशक दीपक कोठारी कोठारी प्रोडक्ट्स लि.

